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लखनऊ उत्तर प्रदेश। एसटीएफ ने फेन्सेडिल कफ सिरप एवं कोकीन युक्त दवाओं की तस्करी गिरोह के अहम सदस्य अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को लखनऊ से दबोचा। लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

एसटीएफ ने फेन्सेडिल कफ सिरप एवं कोकीन युक्त दवाओं की तस्करी गिरोह के  अहम सदस्य अमित कुमार सिंह उर्फ  अमित  टाटा को  लखनऊ से दबोचा।

लखनऊ उत्तर प्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने अवैध रूप से फेन्सेडिल कफ सिरप एवं कोडीन युक्त दवाओं की तस्करी में लिप्त बड़े नेटवर्क के महत्वपूर्ण सदस्य अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को ग्वारी चौराहा, थाना गोमती नगर से 27 नवंबर 2025 की सुबह लगभग 7 बजे गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब एसटीएफ की टीम अवैध ड्रग नेटवर्क पर शासन के निर्देशों के अनुरूप लगातार निगरानी और अभिसूचना संकलन कर रही थी।

फेन्सेडिल तस्करी का बड़ा खुलासा

एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की संयुक्त टीम लंबे समय से इस नेटवर्क पर नज़र रख रही थी। जांच के दौरान भारी मात्रा में अवैध फेन्सेडिल कफ सिरप बरामद होने पर थाना सुशांत गोल्फ सिटी में मु.अ.सं. 182/2024 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले की विवेचना के दौरान विभोर राणा और विशाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त अमित टाटा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया, जिसे गुप्त सूचना पर लखनऊ से पकड़ा गया।

पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे

पूछताछ में अमित टाटा ने स्वीकार किया कि—

उसका संपर्क आजमगढ़ निवासी विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल से हुआ।

शुभम जायसवाल का रांची (झारखंड) में शैली ट्रेडर्स नाम से बड़ा फेन्सेडिल कारोबार था।

पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में कोडीन युक्त सिरप की भारी डिमांड को देखते हुए यह गिरोह फर्जी फर्मों व फर्जी बिलों के जरिए भारी पैमाने पर सिरप की तस्करी करता था।

अमित के नाम पर धनबाद में देवकृपा मेडिकल एजेंसी तथा वाराणसी में श्री मेडिकल नाम से फर्म खुलवाई गई, जिनका संचालन शुभम और उसके साथी करते थे।

शुभम और उसके पार्टनरों ने एबॉट कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से 100 करोड़ से अधिक का फेन्सेडिल खरीदा और फर्जी बिलों के आधार पर तस्करों को बेच दिया।

रांची और गाजियाबाद में साथियों की गिरफ्तारी के बाद शुभम अपने परिवार और अन्य साथियों के साथ दुबई भाग गया और वहीं से फेसटाइम के जरिए नेटवर्क को संचालित कर रहा है।

अमित ने यह भी बताया कि उसे लगभग 28–30 लाख रुपये नकद लाभ के रूप में दिए गए, जिसे वह अपनी पत्नी साक्षी सिंह के बैंक खाते में जमा करता था।

अमित टाटा का आपराधिक इतिहास

अभियुक्त का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है

1. 2014 – धारा 147, 148, 149, 307, 7 CLA, थाना सारनाथ

2. 2015 – मु.सं. 191/2015, आर्म्स एक्ट, थाना कैंट

3. 2016 – मु.सं. 292/2016, आर्म्स एक्ट, थाना कैंट

4. 2021 – मु.सं. 608/2021, धारा 504/506, थाना कैंट

5. 2023 – मु.सं. 134/2023, धारा 147/148/307/120B/506, थाना सारनाथ

6. 2024 – मु.सं. 182/2024, फर्जीवाड़ा व धोखाधड़ी से जुड़ा मुकदमा, थाना सुशांत गोल्फ सिटी

7. 2025 – मु.सं. 177/2025, धारा 115(2)/352/351(3)/110 BNS, थाना मडुआडीह

आगे की कार्रवाई

एसटीएफ ने अमित टाटा को पूर्व से दर्ज मुकदमे मु.अ.सं. 182/2024 में दाखिल करते हुए आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। टीम शुभम जायसवाल सहित फरार साथियों की लोकेशन और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

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